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Saturday, 28 November 2015

***** राधा प्रेम *****


सूर्यदेव राधा जी के कुलदेव हैं ।
राधा जी रोजाना सूर्य को जल देती हैं ।
लेकिन आज राधा जी भाववेश पश्चिम की तरफ जल दे रही हैं,,,,,,
ललिता जी राधा जी से बोली ~ 

हे स्वामिनी जू आप तो बड़ी भोरी हैं सूर्य तो पूर्व से निकले है 
और आप जल पश्चिम की तरफ दे रही हैं ।
राधा जी नेत्रो में करूणाजल भर कर बोली ~ 

ललिते भोरी मैं ना भोरी तो तू है,,,,,
जाने नाय कि मेरा सूर्य तो पश्चिम से निकले है,,,,,

क्योकि पश्चिम की तरफ नंद बाबा को भवन है,,,,,

राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राध राधे राधे

Sunday, 18 October 2015

भगवान् श्री कृष्ण का प्रेम



" भगवान् श्री कृष्ण का प्रेम पा कर मनुष्य सारी बाह्य वस्तुओं को भूल जाता है। जगत का ख्याल उसे नहीं रहता,यहाँ तक कि सब से प्रिय अपने शरीर को भी भूल जाता है। जब ऐसी अवस्था आवे तब समझना चाहिए कि प्रेम प्राप्त हुआ ।"
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क्या आपको 'कृष्ण' का अर्थ मालूम है? वह जो प्रत्येक व्यक्ति और वस्तु को अपनी और आकर्षित करता है, कृष्ण है| ऐसा आकर्षण जो रोका ही न जा सके! पूरा भागवत यह बताता है कि कृष्ण कितने मंत्रमुग्ध कर देने वाले थे| जब वे रथ में बैठ कर गलियों से गुजरते थे तो लोग मूर्ति की तरह स्तब्ध हो कर उन्हें निहारते रह जाते थे... उनके निकल जाने के बाद भी वे बस वहां खड़े रह जाते थे... गोपियाँ कहती 'जाते जाते वे मेरी नज़रे ही ले गए...'| यानी, ऐसे स्थिति, जब दर्शक और दृश्य एक हो जाए..|
ऐसे बहुत से वृत्तांत हैं... एक गोपी, जो श्रृंगार कर रही थी; कृष्ण के आने की खबर सुनकर, एक ही आंख में प्रसाधन लगे हुए उन्हें देखने दौड़ पड़ी.. दिव्यता अत्यंत आकर्षक है.. (ताकि) हमारा मन तुच्छ बन्धनों से ऊपर उठ सके.. इसीलिए इसे 'मोहन' कहा गया है; मोहन ह्रदय को आकर्षित करता है, मोहित करता है और प्रीति से भर देता है...|