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Thursday, 23 February 2017

भगवान् नारायण ही सर्वोपरी हैं

नारायणो नाम नरो नराणां प्रसिद्धचौरः कथितः पृथिव्याम्।
अनेकजन्मार्जितपापसंचयं हरत्यशेषं श्रुतमात्र एव।।
'इस पृथ्वी पर 'नारायण' नामक एक नर (व्यक्ति) प्रसिद्ध चोर बताया गया है, जिसका नाम और यश कानों में प्रवेश करते ही मनुष्यों की अनेक जन्मों की कमाई हुई समस्त पाप राशि को हर लेता है।'
(वामन पुराण)
भगवान् नारायण ही सर्वोपरी हैं और उनके चरणों में अपने को सर्वतोभावेन समर्पित कर देना ही कल्याण का एकमात्र उपाय है । वे समस्त भूतों के ह्रदय में स्थित हैं । भगवान् ही माया से परे हैं और उनकी उपासना ही माया से छुटने का एकमात्र उपाय है । उन पर विश्वास करों, उनकी आराधना करों, उनके नाम की रट लगाओं और उनका गुणानुवाद करो । ॐ नमो नारायणाय ।
वे वास्तव में दया के पात्र है, जो भगवान् नारायण की उपासना नहीं करते । उन्होंने अपनी माता को व्यर्थ ही प्रसव कष्ट दिया । जो लोगो नारायण-नाम का उच्चारण नहीं करते, वे पाप ही खाते हैं और पाप में ही रहते है । जो लोग भगवान माधव को अपने ह्रदय मन्दिर में
स्थापितकरके प्रेम-रुपी सुमन से उनकी पूजा करते है, वे मृत्यु पाश से छुटते हैं ।
कल्याण, वर्ष २६, भक्त-चरितांक,पुस्तक कोड ४०, भक्त 'श्रीविष्णुचित (पेरी-आलवार)' जी के चरित्र से संकलित...
.......जय श्री हरि